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50 मीटर दूर कूड़ा डंपिंग स्थल, बधुआपुर में दुर्गंध और धुएं से लोग परेशान; नगर आयुक्त से तत्काल कार्रवाई की मांग
- दैनिक लोक भारती
- 22 Aug, 2026
एडवोकेट विजय प्रताप सिंह समेत क्षेत्रवासियों ने नगर निगम को सौंपा पत्र, बायोमाइनिंग से कूड़ा निस्तारण और स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने की मांग
कानपुर। वार्ड नंबर 53 के अंतर्गत आने वाले बधुआपुर गांव में आबादी से करीब 50 मीटर की दूरी पर स्थित कूड़ा डंपिंग स्थल को लेकर क्षेत्रवासियों ने गंभीर चिंता जताई है। एडवोकेट विजय प्रताप सिंह और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से कानपुर नगर निगम के नगर आयुक्त को पत्र भेजकर डंपिंग स्थल से फैल रही कथित असहनीय दुर्गंध, धुएं, आग लगने की घटनाओं और कूड़े के अनुचित निस्तारण की शिकायत की गई है। क्षेत्रवासियों ने इसे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा गंभीर संकट बताते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक डंपिंग स्थल पर लंबे समय से बड़ी मात्रा में कूड़ा एकत्र किया जा रहा है। पुराने और नए कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं होने के कारण आसपास के इलाकों में लगातार दुर्गंध बनी रहती है। उनका कहना है कि कूड़े के सड़ने से निकलने वाली दुर्गंध और संभावित हानिकारक गैसों के कारण लोगों को घरों में रहना तक मुश्किल हो रहा है।
कूड़े में आग लगने और धुएं से परेशानी का आरोप
क्षेत्रवासियों ने शिकायत में कहा है कि डंपिंग स्थल पर कूड़े के ढेर में समय-समय पर आग लगने अथवा आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई बार आग लंबे समय तक सुलगती रहती है, जिससे निकलने वाला घना धुआं आसपास के आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचता है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि दुर्गंध और धुएं के कारण बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्र में रहने वाले कई परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
मृत पशुओं के निस्तारण को लेकर भी उठाए सवाल
पत्र में क्षेत्रवासियों ने डंपिंग स्थल पर मृत पशुओं के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के मुताबिक शहर में मृत पाए जाने वाले गाय, कुत्ते, बिल्ली और अन्य पशुओं के शव भी यहां लाए जाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनके निस्तारण के दौरान उत्पन्न होने वाली दुर्गंध और धुएं से आसपास का वातावरण प्रभावित होता है।
इसके अलावा कुछ अस्पतालों अथवा अन्य स्रोतों से कथित तौर पर संवेदनशील या चिकित्सीय अपशिष्ट यहां पहुंचाए जाने की शिकायत भी की गई है। क्षेत्रवासियों ने इस दावे की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट के निस्तारण में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कई बार शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान नहीं होने का दावा
एडवोकेट विजय प्रताप सिंह और क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर नगर निगम और संबंधित विभागों के समक्ष कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी और प्रभावी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से दुर्गंध, धुएं और प्रदूषण के बीच रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
शिकायत में कहा गया है कि समस्या का असर विशेष रूप से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण इलाज पर होने वाला खर्च बढ़ रहा है और परिवारों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
पुराने कूड़े की बायोमाइनिंग से निस्तारण की मांग
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम के सामने कई मांगें रखी हैं। सबसे प्रमुख मांग डंपिंग स्थल पर जमा पुराने कूड़े का वैज्ञानिक और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से बायोमाइनिंग, बायो-रिमेडिएशन अथवा अन्य उपयुक्त तकनीक से निस्तारण कराने की है।
इसके साथ ही कूड़े में आग लगने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने, आग लगाने वालों की पहचान कर कार्रवाई करने तथा डंपिंग स्थल पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है।
सीसीटीवी और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग
शिकायतकर्ताओं ने डंपिंग स्थल पर पर्याप्त निगरानी व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे कूड़े में आग लगाने जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा और जिम्मेदार लोगों की पहचान भी संभव होगी।
मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था की तत्काल जांच कराने तथा इसे आधुनिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से संचालित करने की मांग भी की गई है। यदि दहन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है तो प्रदूषण नियंत्रण तकनीक, उपयुक्त चिमनी और प्रभावी उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली सुनिश्चित करने की मांग रखी गई है।
बायोमेडिकल कचरे की जांच और ग्रीन बेल्ट की मांग
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि किसी भी प्रकार के जैव-चिकित्सीय या संवेदनशील अपशिष्ट को सामान्य नगरपालिका कूड़े के साथ डंप किए जाने की शिकायत की जांच कराई जाए। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा डंपिंग स्थल के आसपास तकनीकी मानकों के अनुसार घनी हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) विकसित करने और बड़े वृक्ष लगाए जाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इससे धूल, दुर्गंध और प्रदूषण के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रभावित लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर की मांग
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों के सहयोग से बधुआपुर और आसपास के इलाकों में नियमित निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
पत्र में डंपिंग स्थल और आसपास के क्षेत्र की वायु गुणवत्ता, जल गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की गई है।
संयुक्त टीम से स्थलीय जांच कराने की अपील
शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय संयुक्त समिति से स्थलीय जांच कराने और समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने की मांग की है। उन्होंने नगर आयुक्त से स्वयं अथवा सक्षम अधिकारियों की टीम भेजकर मौके का निरीक्षण कराने और कार्रवाई की समय-सीमा तय करने की अपील की है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि डंपिंग स्थल आबादी के बेहद करीब होने के कारण समस्या को केवल कूड़ा निस्तारण तक सीमित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थानीय जीवन-व्यवस्था से जुड़ा विषय है। अब लोगों की निगाह नगर निगम की ओर है कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और बधुआपुर के लोगों को दुर्गंध, धुएं और प्रदूषण से राहत कब मिलती है।
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